सवेरे ही खो गए…

Nandini/ November 3, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 4 comments

शौक जीने का रख के निकले थे जो घर से,
रास्ते में दो पल उनसे मिले, शौक़ीन हो गए

चूज़े के उड़ने को आसमान क्या दिखाया,
पंछी बनते ही घोंसलों से उड़ गए

एक पल जिनके बिना सांस भी ना आती थी,
किसी और के हो कर जीता छोड़ गए

जो आंख के आँसू को मोती थे कहते,
कोरों में समुन्दर को सुखा के चले गए

हर वक़्त कोई साथ मिले ये ज़रूरी तो नहीं,
ज़ख्म भी तो वक़्त के सीने से लग गए

तेरे काँधे पे रखे मेरे सर के टिप्पे से पूछ,
मेरे अरमान कहीं क़त्ल तो नहीं हो गए

सारी रात तुझे देखने की चाह में,
यूँ जागे, कि मेरे सवेरे ही खो गए।

~नन्दिनी पी

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4 Comments

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