बातें….

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

बातें जैसे ख़त्म सी हो गईं हैं, दिल में तूफानों का रेला सा है
बनते बिगड़ते अरमानों का मेला सा है,
फिर भी जाने क्यों, बातें जैसे थम सी गईं हैं।

कहने को तो ये भी कह दूँ, साँसें बोझिल लगती हैं
तुम बिन मेरी रातें जैसे, सीली सीली गुज़रती हैं
ये भी कहना था, कि अनजान डर से दिल बैठा सा जाता है,.
दूर चले जाओगे तुम, ये ख़याल सारी रात जगाता है।

माना तुम दुनिया से लड़ते हो,
आकर सुकूँ के दो पल ही तो चाहते हो,
माना कि ये उदास चेहरा तुम्हें तनिक नहीं भाता है,
तुम्हारे दिल को चीर सा जाता है,

फिर भी सुनो ना…
मुझे कहना है तुमसे, मेरे अंदर भी एक दुनिया है,
जिससे मैं रोज़ उलझती हूँ, सच होंगे ख़्वाब जो देखे हैं,
हर पल ये उससे कहती हूँ, ना चाहूँ भी तो सबसे ये राज़ ही रखती हूँ,

कहना है वो सबकुछ जो गर्त में कहीं छुपा रखा है,
लेकिन कैसे कहूँ…..???
सुन सको तो सुन लो वो बातें, जो दफ़्न सी हो गईं हैं।

Share this Post

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*