हम मट्ठर हैं या वो कमज़ोर

Nandini/ June 19, 2020/ Social Issues/ 1 comments

अरे! ये क्या हुआ, कैसे हुआ, और क्यों हुआ? वो, वो ऐसे कैसे तमा कर सकता है ? वो तो कामयाबी की इतनी ऊंचाईयों पर था, उसने तो इतनी अच्छी फिल्में भी की थीं। और अभी अभी तो वो इतना बड़ा कलाकार बना था। लाखों चाहने वाले थे जो उसे इतना चाहते थे, कितने ही ऐसे लोग थे जिनके लिए वो आदर्श था। और वो याद है उसकी आखरी पिक्चर, छिछोरे, उसमें क्या सिखाया था उसने? यही ना कि कुछ भी हो जाए, हालात कितने भी बुरे क्यों ना हो जाएं, आत्महत्या कोई विकल्प नहीं है। बताओ, पर्दे पर इतनी बड़ी बात समझाने वाला ये कलाकार आज इतना कमज़ोर कैसे पड़ गया? अरे किसी से तो बात करता, कोई तकलीफ थी तो हमें बताता, कम से कम ये तो ना होने देते जो हुआ है। अपने पिता और बहनों के बारे में ही सोच लेता, अभी उम्र ही क्या थी, क्या हो गया है आजकल बच्चों को, ज़रा सी तकलीफ हुई नहीं कि बस आत्महत्या करने निकल पड़ते हैं, ज़िन्दगी की अहमियत ही नहीं समझते।
यही सब सुन रहे हैं ना हम कल से! लेकिन क्या किसी ने ये सोचा कि पर्दे पर जो जीने की बातें कर रहा था, वो एक किरदार था, और जिसने मौत को गले लगाया वो एक आम इंसान। किसी ने ये दिल से ये जानने की कोशिश की, कि ये कदम उठाते वक़्त वो कितना विचलित होगा। एक व्यक्ति जब ऐसा कोई कदम उठाता है, तो यकीन मानिए, उसके अंदर सब कुछ खत्म हो चुका होता है। उस वक़्त वो नहीं जान पाता कि उसके जाने के बाद किस व्यक्ति पर क्या बीतेगी, क्योंकि उस वक़्त उसे बस यही दिखता है, कि उसका चला जाना उसके हर करीबी के लिए सहायक ही होगा। अपने हों या पराए, दोस्त हों या दुश्मन, ये सभी आपकी लड़ाई में तब काम आते हैं, जब लड़ाई बाहर वालों से हो। लेकिन जब द्वंद स्वयं से हो, तो ये सब वो बाहर वाले बन जाते हैं, जो आपके करीब होते हुए भी आपको जान नहीं पाते। कामयाबी, पैसा, शौहरत ये सब भौतिक सुख हमें कुछ ही दिन छल पाते हैं, जीवन की सच्चाई कुछ और ही होती है।
हां, पड़ जाते हैं लोग कमज़ोर, नहीं सोच पाते खुद से ऊपर, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो ज़िन्दगी जीना नहीं चाहते, इसका मतलब ये है, कि ज़िन्दगी उन्हें वो शांति नहीं दे पाती। हम अक्सर कहते हैं, और इस हादसे के बाद कई बड़े बड़े नाम ये कज रहे हैं, ये गलत किया, हमसे बात करते। लेकिन क्यों? क्यों कोई आपसे बात करेगा जब वो खुद से भी बात नहीं कर रहा। और अगर वो आगे बढ़कर आपसे बात नहीं कर रहा था, तो आप कहाँ थे, वो व्यक्ति एक ही दिन में तो मानसिक रूप से अशांत नहीं हुआ होगा ना। रोज़ वो ना जाने खुद से कितनी लड़ाई लड़ता होगा, रोज़ रात को मौत उसके पास आती होगी, और उसने ज़िन्दगी को चुना होगा। फिर ऐसा व्यक्ति कमज़ोर कैसे हुआ, कैसे आपने और हमने उसके चरित्र को, उसके स्वभाव को इतना कमज़ोर बना दिया।
मैं आत्महत्या करने के फैसले को सही या गलत नहीं कहती, क्योंकि मेरा मानना है, कि ये फैसला आसान नहीं होता, और ना ही हमें है हक़ होता है कि हम किसी के चले जाने के बाद उसे या उसके किसी भी फैसले को गलत ठहराएं। कभी कभी मौत हमें वो शांति देती है, जो जीवन नहीं दे पाता। व्यक्ति जो अपनी शांति की खोज में निकल चुका है, उस पर टिप्पणी कर के अब हमें कुछ हासिल नहीं होगा, बेहतर हो कि जो आपके आस पास हैं आप उन्हें प्यार दें और उनका ध्यान रखें। सब ठीक हो जाएगा, ये तसल्ली देने से पहले, ये समझें कि सब यूँ ही ठीक नहीं होता। तुम कमज़ोर नहीं हो, ये बोलने से पहले सोचें कि सामने वाला भी इंसान है, वो भी कमज़ोर पड़ सकता है, उस पर अपनी उम्मीदों का इतना बोझ ना डालें की अपने आंसू छुपाते छुपाते वो खुद को ही अपने अंदर छुपा ले। मानिए और समझिए कि गलतियां सब से होती हैं, आपसे भी हुई होंगी, लेकिन शायद आप थोड़े से ज़्यादा मट्ठर थे, सो ज़िन्दगी जी गए।

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1 Comment

  1. You must not expect old heads upon young shoulders.

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