मुकम्मल एहसास

Nandini/ February 13, 2017/ Love/ 2 comments

प्यार, मोहब्बत, इश्क़ सब आधे अधूरे शब्द हैं , लेकिन जिस के दिल में बस जाएँ उसे पूरा कर देते हैं | ये एहसास बसता तो हर दिल में है बस समझ कभी कभी ही आता है | कहीं तो प्यार एक खुशनुमा एहसास बनके छाता है , तो कहीं एक दर्द छोड़ जाता है| कहीं तो वीराने में गुलशन खिला देता है , तो कहीं गुलशन को ही वीरान कर देता है | किसी की ज़िन्दगी में हवा के झोंके की तरह आता है , तो कहीं आंधी बनकर सब उड़ा ले जाता है | कहीं कोई उम्मीद जगा जाता है , तो कहीं मायूसी छोड़ जाता है |
कितने ही रंग हैं प्यार के, दुल्हन के जोड़े की तरह सुर्ख लाल, तो आँखों में चमकते जुगनू की तरह नीला | हर मौसम में प्यार का एक नया ही रंग छुपा होता है, कहीं पतझड़ के मौसम का पीलापन लिए हुए, तो कहीं सावन की हरियाली लिए हुए , तो कहीं शीत ऋतू की तरह गुलाबी | समंदर की तरह गहरा है तो आकाश की तरह असीमित भी , हर एक की ज़िन्दगी में प्यार के अपने ही मायने होते हैं | लेकिन ये होता कब है और कैसे ? ये कोई आज तक समझ नहीं पाया | क्यों दिल को कोई इतना अपना लगने लगता है की उसके बिना ज़िन्दगी के सारे मायने ही बदल जाते हैं | क्यों किसी का होना या न होना अचानक हमारी ज़िन्दगी की दिशा ही बदल देता है | कब और कैसे हम खुद को खो कर किसी और को पा लेते हैं ? अजीब हालात होते हैं प्यार में डूबे इंसान के , बैठे बैठे यूँही मुस्कुरा देना, घंटों चुपचाप बैठे दिन गुज़ार देना, कभी बारिश में झूम के नाचना तो कभी यूँही आंसू बहाना, अचानक ही आईने में खुद को देखते हुए शर्मा जाना | ये सब पागलपन की ही निशानी तो है , तो क्या इश्क़ इंसान को पागल बना देता है ? मन करता है की सारी दुनिया को चीख कर बता दें की हमें प्यार है , वो एक शख्स दुनिया का सबसे खूबसूरत इंसान नज़र आने लगता है और हम अपने सुख दुःख सब उसके साथ जोड़ देते हैं | खुश वो होता है और मुस्कुराते हम हैं, चोट उसे लगती है दर्द हमे होता है | सोते जागते हम बस उसी एक के बारे में सोचते हैं | ज़िन्दगी अचानक एक हसीं ख्वाब लगने लगती है, और हम उसके मुकम्मल होने का इंतज़ार करने लगते हैं |
लेकिन प्यार में हर वक़्त सब अच्छा ही नहीं होता , एक ऐसा समय भी आता है जब यही प्यार हमारा इम्तेहान लेता है | प्यार सिर्फ एक खूबसूरत एहसास नहीं होता बल्कि इसके साथ एक ज़िम्मेदारी भी जुडी होती है | ज़िम्मेदारी जिससे प्यार करो उसे समझने की, उसके हर दुःख में चट्टान की तरह साथ खड़े रहने की | लेकिन ये भी सच है की हर प्रेम कहानी को मंज़िल नहीं मिलती | कुछ ऐसे भी प्यार होते हैं जो इस शब्द की ही तरह अधूरे रह जाते हैं | कहीं मजबूरियां तो कहीं नासमझियां इसे पूरा नहीं होने देतीं |

तो क्या प्यार बस वही होता है जिसे मंज़िल मिले , या उस प्यार के भी मायने हैं जिससे मंज़िल कोसों दूर हो | हर इश्क़ मुकम्मल नहीं होता और हर शख्स बेवफा नहीं होता | ये वो एहसास है जो अगर एक बार दिल में घर कर जाए तो ज़िन्दगी बदल देता है | कहीं तो प्यार एक लंबा इंतज़ार है , और कहीं जीवन में आयी बहार | प्यार एक सफर है जिसपे चलने वाले बस एक दूसरे का साथ चाहते हैं , फिर चाहे ये साथ ज़िन्दगी भर का हो या चंद क़दमों का | अगर इस सफर में एक दूसरे से कोई उम्मीद ना करें तो ये सफर और भी खूबसूरत हो जाता है | हाथों में हाथ डाले बस निकल चलें , ना रास्तों की फिक्र ना मंज़िलों की | प्यार में मीरा का इंतज़ार है तो राधा का त्याग भी है और रुक्मिणी सा समर्पण भी है | इसे किसी शब्द में बांधना ही मुमकिन नहीं है , ये तो कई भावनाओं का समंदर है जिसके पर जाने के लिए इसमें डूबना ज़रूरी है |ये किताब में रखे हुए उस सूखे फूल की तरह है जिसकी खुशबू वक़्त के साथ भी काम नहीं होती |

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2 Comments

  1. शानदार विश्लेषण

  2. Pingback: मुकम्मल एहसास | Site Title

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