संवेदनहीन संवेदना

Nandini/ March 7, 2018/ Social Issues/ 0 comments

I learnt so much abt heart attack and cardiac arrest and excercise and nutrition and stress in the past 24 hrs… I can give an exam. And now.. They say its accidental drowning.. Out of syllabus 😟 Cheating ho Gaya …😂😂

शराब भी बड़ा भेदभाव करती है गरीब आदमी को नाली में गिराती है…. और अमीर आदमी को बाथटब में….🤔🤔

Aaj ka Gyan  उतनी ही लें Mug में… 🥂🥃🍻 *जिसमे आप न जाएँ Tub में..* 😂

सुबह से काम में लगी थी,,,         मोबाइल को हाथ तक नहीं लगाया,,,   अभी – अभी मोबाइल से एक चिंतातुर आवाज़ आई ,,,,,,  *””काय जिज्जी””,,,*             *”” हो,,,,, कि टब में गईं,,,,,,””* 🤔🤔🙃

यशजी उपर गये.. विनोद खन्ना गये… श्रीदेवी भी गयी.. अब अगर उपर चांदनी – 2 बनाने की घोषणा हुई तो?????? .. .. ऋषि कपूर चिंताग्रस्त ..

ये सब पढ़ कर तो आपने शायद अंदाजा भी लगा लिया होगा कि आज मैं किस विषय में बात करने वाली हूँ , श्रीदेवी! नहीं नहीं मैं आपको उनके बारे में ऐसा कुछ नया नहीं बताने वाली जो आपको शायद पता ना हो, क्योंकि सच तो ये है कि क्या बड़े और क्या बूढ़े , आज सबकी जुबां पर श्रीदेवी और उनकी मौत से जुडी कहानी रटी हुई है | मेरी पांच साल कि बेटी जो किसी वजह से अपने दादा दादी के पास थी, उसने समाचार देखते ही कहा ” माँ ये श्रीदेवी है ना! आपको पता है बेचारी टब में गिर के मर गई, इतनी अच्छी थी ना , इतनी अच्छी लड़की के साथ ऐसा कैसे हो सकता है ? ” और मैं उसे बस एकटक देखे जा रही थी , कि इतनी बारीकी से ये सब कुछ जानती है, समझते देर ना लगी कि जब घर में सब बातें करते होंगे तो उसने हर बात को गौर से सुना होगा | बात यहीं ख़त्म होती तो समझ भी आता, लेकिन जब उसने कहा कि इसको मारा होगा, तो ये सुनते ही होश उड़ गए , इतनी सी बच्ची और ये सोच?

लेकिन गलती उसकी भी तो नहीं है, पिछले १० दिनों में हर मुख्य समाचार में सिर्फ एक ही बात छाई हुई थी, श्रीदेवी कि मृत्यु कब हुई, कैसे हुई, ये हत्या है या हादसा ? ऐसा लग रहा था जैसे देश में और कहीं कुछ घटित ही ना हुआ हो , चौबीसों घंटे सिर्फ एक ही खबर लगातार चली| ऐसे में आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर आज के बच्चे भी उन्हें इतनी अच्छी तरह जानने लगे हैं तो | कई लोगों ने तो P.hd तक कर डाली श्रीदेवी के ऊपर, ऐसा नहीं है कि मैं समाचार नहीं देख रही थी, हर नए अपडेट पर तो मेरी भी नज़रें थीं , लेकिन सबसे दुखद बात ये थी कि TV channels ने इस खबर को इतना महत्त्व दिया कि मज़ाक ही बना दिया |

इतनी संवेदनशील स्थिति भी लोगों को संवेदनहीन बनने से नहीं रोक पाई, श्रीदेवी कि मौत से लेकर उनकी अंतिम यात्रा तक को इस तरह गढ़ा गया जिससे लोग टीवी के सामने से हटना तो दूर, चैनल तक नहीं बदलते थे| न्यूज़ channels के बीच एक अजीब ही जंग चालू थी, कौन कितने अच्छे से कहानी को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करता है, किसी का दावा था कि १०० कैमरों से पल पल कि खबर दी जायेगी, किसी का  दावा था सबसे पहले सबसे तेज़ खबर हम देंगे | कोई कह रहा था , बेटियों का रो- रो कर बुरा हाल है, तो कोई कह रहा था अर्जुन कपूर पिता का सहारा बन कर खड़े हैं, अनिल कपूर ने बेटियों को अपने पास रखा है, सोनम कपूर बड़ी बहन का फ़र्ज़ निभा रहीं हैं और भी न जाने क्या क्या| मैं जानना चाहती हूँ , कि कौन सी बेटी माँ के जाने कि ख़ुशी मनाएगी, ऐसा कौन सा बेटा होगा जो दुःख में पिता को छोड़ देगा, ऐसा कौन सा भाई होगा जो संकट कि घड़ी में परिवार के साथ नहीं खड़ा होगा| सिर्फ इसीलिए कि जाने वाली एक जानी मानी हस्ती थी , उसकी अपनी ज़िन्दगी से जुड़ीं कुछ अच्छी कुछ बुरी बातें थीं, मीडिया ने हर पल को एक सनसनी खेज खबर बना दिया|

हद तो तब हो गई जब परिवार के लोगों के मुंह में माइक घुसा के उनसे इस दुखद हादसे कि प्रतिक्रिया मांगी जा रही थी, और जब मीडिया का ये दांव नहीं चला तो एक नया दांव अपनाया गया | आखरी दर्शन के लिए जहाँ मोबाइल या कैमरा ले जाने की इजाज़त नहीं थी, वहां भी लोग छुप कर मोबाइल लेकर गए , और परिवार के हर सदस्य से मिलकर उसकी प्रतिक्रिया से दर्शकों को रूबरू कराया गया | फिर बाहर जमा भीड़ का तमाशा, जो सिर्फ वहां आने वाले बड़े कलाकारों को देखने के लिए जमा हुए थे, या ये कहें कि जो इस हद तक असंवेदनशील थे कि श्मशान में जाते हुए परिवार के लोगों को अपने आंसूं रोक उन्हें चिल्लाना पड़ा| ये सब भी शायद हमारे भारतवर्ष के संस्कारी लोगों को कम पड़ रहा था, इसीलिए ये चुटकुले बना कर उन्हें हर जगह फैलाया गया|

श्रीदेवी जिन्होंने अपने जिंदा रहते हमें अपने नित नए अंदाज़ से कभी हंसाया, तो कभी रुलाया, कभी गुदगुदाया, तो कभी बेपनाह प्यार सिखाया, उन्हें कहाँ पता था कि इस तरह उनका हमें अलविदा कहना भी उनके चाहने वालों के लिए मात्र मनोरंजन बन कर रह जाएगा| जिस तरह इस खबर का इस्तेमाल मीडिया ने किया ऐसा लग रहा था, कि जो खबर परिवार के लिए सदमा है, उस खबर ने इन न्यूज़ चैनल के दफ्तरों में चांदनी बिखेर दी थी|

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