कल रात

Nandini/ July 7, 2020/ कविता/Poetry/ 5 comments

बहुत देर तक बिस्तर पर करवट बदलती रही, वो रूह जो तेरे छूने से आराम पाती थी, मैंने समझाया उसे, बैठाया अपने पास पूछा भी कि क्या हुआ, क्यों है वो उदास। ये ज़ुल्फ़ें बिखरी क्यों हैं, ये कमरे में अंधेरा क्यों है क्यों तू पहले की तरह हंसती नहीं है, क्यों अब चेहरे पर वो उम्मीद नहीं है। आ

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तुम्हारा वजूद और मैं…

Nandini/ June 24, 2020/ कविता/Poetry/ 3 comments

क्या है जो तुम्हें मुझसे जुड़ने नहीं देताक्या है जो मेरे दिल को उड़ने नहीं देतामैं तुम्हारे वजूद में कहीं नज़र नहीं आतीमैं तुम्हारे रोज़ के किस्सों में नहीं छातीना तुम्हारे किसी ख्वाब का हिस्सा हूँहां तुम्हारी हसीं रात का भूला हुआ सा किस्सा हूँतेरा नहीं आना तो अब ज़ाहिर सी बात हैतेरी इंतजारी में ना गुज़रे, कहां ऐसी रात

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वो प्यार ही क्या, जो तन्हा कर जाए

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

सपनों की दुनिया से, जब हकीकत की ज़मीं पर आएकांटे ही कांटे थे राहों में, जहां जहां कदम बढ़ाए हर रिश्ता, हर लम्हा जैसे, बेमानी लगने लगता है,जब अपना कोई हम पर, इस तरह उंगली उठाए वो, जो वादा करके निभाने का दावा किया करते हैं,क्या हुआ उस वादे का, अंजाम कोई उनको बतलाए आसां नहीं है किसी के लिए,

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