मुझमें ही बसा करते हो…

Nandini/ December 9, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 0 comments

तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा

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कल कभी नहीं आता…

Nandini/ July 10, 2020/ कविता/Poetry/ 9 comments

कल, कभी नहीं आता, जो आता है वो है आज आज जाने दे, कल बहुत सारा समय दूँगा, माफ कर दो, आज काम ज़्यादा था, आ नहीं पाया, लेकिन कल… कल पक्का आऊंगा, कुछ अपनी कहूँगा, कुछ तुम्हारी सुनूँगा, आज, फिर तुम्हारा कल आया था, तुम्हारा इंतज़ार कर, बीता हुआ कल हो गया। कल, कभी नहीं आता, जो आज छोड़

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ऐ ज़िन्दगी तू बहुत खूबसूरत है

Nandini/ June 26, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 17 comments

ऐ ज़िन्दगी तू बहुत खूबसूरत हैहाँ, ये सच है कि कुछ ग़म से मैं परेशां हूँहाँ, ये सच है कि कुछ दिन से मैं हैरां हूँनहीं हूँ उस तरह की कि जैसे पहले हुआ करती थीनहीं हूँ उस वक़्त की, कि जब दिल खोल के हंसा करती थीलेकिन फिर भी ये सच हैकि तू आज भी उतनी ही खूबसूरत है

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हुनर

Nandini/ June 26, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

मुझमें ये हुनर है, कि मुझमें कोई हुनर नहींजीवन को जीने का जज़्बा तो है,पर कैसे जीना है, ये पता नहीं मैं गल्तियों को अपनी स्वीकारती हूँ,तुम किसी काम की नहीं, ये बोले कोई,उससे पहले ही ये सच जानती हूँ,मैं जानती हूँ, कि कोई मेरी ओरखींचा चला आए,मेरे अंदर ऐसी कोई बात नहीं, ना पाक कला में निपुण हूँ,ना घर

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मैं संभल गई

Nandini/ June 25, 2020/ कविता/Poetry/ 2 comments

सुनो, मत आओ यूँ मेरे पास,अब मैं संभल चुकी हूँतुम्हारे हर एहसास, हर बात सेअब मैं संभल चुकी हूँ,अंधेरों से उजाले का सफर तय कर चुकी हूँदेखो, कि मैं संभल चुकी हूँ।उन खोखले अल्फाजों का अब,कोई असर ना मुझपर होगा,भूलना तो कभी तुम्हें चाहा ही नहीं पर,अब मेरी राह का हमसफ़र ना तू होगा,तुम करोगे सवाल,कि क्यों मैं बावली सी

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