तुम्हारा वजूद और मैं…

Nandini/ June 24, 2020/ कविता/Poetry/ 3 comments

क्या है जो तुम्हें मुझसे जुड़ने नहीं देताक्या है जो मेरे दिल को उड़ने नहीं देतामैं तुम्हारे वजूद में कहीं नज़र नहीं आतीमैं तुम्हारे रोज़ के किस्सों में नहीं छातीना तुम्हारे किसी ख्वाब का हिस्सा हूँहां तुम्हारी हसीं रात का भूला हुआ सा किस्सा हूँतेरा नहीं आना तो अब ज़ाहिर सी बात हैतेरी इंतजारी में ना गुज़रे, कहां ऐसी रात

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बातें….

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

बातें जैसे ख़त्म सी हो गईं हैं, दिल में तूफानों का रेला सा हैबनते बिगड़ते अरमानों का मेला सा है,फिर भी जाने क्यों, बातें जैसे थम सी गईं हैं। कहने को तो ये भी कह दूँ, साँसें बोझिल लगती हैंतुम बिन मेरी रातें जैसे, सीली सीली गुज़रती हैंये भी कहना था, कि अनजान डर से दिल बैठा सा जाता है,.दूर

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वो प्यार ही क्या, जो तन्हा कर जाए

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

सपनों की दुनिया से, जब हकीकत की ज़मीं पर आएकांटे ही कांटे थे राहों में, जहां जहां कदम बढ़ाए हर रिश्ता, हर लम्हा जैसे, बेमानी लगने लगता है,जब अपना कोई हम पर, इस तरह उंगली उठाए वो, जो वादा करके निभाने का दावा किया करते हैं,क्या हुआ उस वादे का, अंजाम कोई उनको बतलाए आसां नहीं है किसी के लिए,

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मैंने कब ये सोचा था!

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

मैंने कब ये सोचा था एक ऐसा दिन भी आ जाएगादीवानों की जैसे मैं छज्जे पे रात गुज़ारूँगी,जब चांद बादल की ओट में, लुका छिपी खेलेगामैं छत पर लेटे लेटे, तारों को यूँ निहारूँगी।मैंने कब ये सोचा था..मैं, के इन पेड़ों के साए से भी डर जाती थी,आज उसी को ताक ताक आंखों में रैन उतारूंगीमैंने कब ये सोचा था..चारों

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प्यार, उम्र और समाज..

Nandini/ June 20, 2020/ Love, Social Issues/ 0 comments

देखो तो ज़रा, ना उम्र का लिहाज़ किया ना  जवान बच्चों का , भला ये  भी कोई उम्र है दूसरी शादी की ? भई हमने तो इस उम्र में माँ–बाप को बच्चों की शादी के लिए दौड़ते भागते देखा है ,यहाँ तो रीत ही पलट दी इन लोगों ने , माँ–बाप मंडप में बैठे हैं और बच्चे अतिथि स्वागत में

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