मुझमें ही बसा करते हो…

Nandini/ December 9, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 0 comments

तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा

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कल कुछ यूँ होगा…

Nandini/ July 29, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 10 comments

कल कुछ यूँ होगा, कि हम जुदा हो जाएंगे, चाहें या नहीं, बस हमारे कहाँ चल पाएंगे, जब होगा कुछ यूँ, कि तुम हमें, और हम तुम्हें रोक ना पाएंगे, आंसू भी कहाँ पूरी तरह बह पाएंगे, ये सच है कि हमेशा कुछ नहीं रहता, पर सच तो ये भी है, कि हमारे निशां सदा को रह जाएंगे। खट्टी मीठी

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कल रात

Nandini/ July 7, 2020/ कविता/Poetry/ 5 comments

बहुत देर तक बिस्तर पर करवट बदलती रही, वो रूह जो तेरे छूने से आराम पाती थी, मैंने समझाया उसे, बैठाया अपने पास पूछा भी कि क्या हुआ, क्यों है वो उदास। ये ज़ुल्फ़ें बिखरी क्यों हैं, ये कमरे में अंधेरा क्यों है क्यों तू पहले की तरह हंसती नहीं है, क्यों अब चेहरे पर वो उम्मीद नहीं है। आ

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तुम्हारा वजूद और मैं…

Nandini/ June 24, 2020/ कविता/Poetry/ 3 comments

क्या है जो तुम्हें मुझसे जुड़ने नहीं देताक्या है जो मेरे दिल को उड़ने नहीं देतामैं तुम्हारे वजूद में कहीं नज़र नहीं आतीमैं तुम्हारे रोज़ के किस्सों में नहीं छातीना तुम्हारे किसी ख्वाब का हिस्सा हूँहां तुम्हारी हसीं रात का भूला हुआ सा किस्सा हूँतेरा नहीं आना तो अब ज़ाहिर सी बात हैतेरी इंतजारी में ना गुज़रे, कहां ऐसी रात

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बातें….

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

बातें जैसे ख़त्म सी हो गईं हैं, दिल में तूफानों का रेला सा हैबनते बिगड़ते अरमानों का मेला सा है,फिर भी जाने क्यों, बातें जैसे थम सी गईं हैं। कहने को तो ये भी कह दूँ, साँसें बोझिल लगती हैंतुम बिन मेरी रातें जैसे, सीली सीली गुज़रती हैंये भी कहना था, कि अनजान डर से दिल बैठा सा जाता है,.दूर

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