तुम्हारा वजूद और मैं…

Nandini/ June 24, 2020/ कविता/Poetry/ 3 comments

क्या है जो तुम्हें मुझसे जुड़ने नहीं देताक्या है जो मेरे दिल को उड़ने नहीं देतामैं तुम्हारे वजूद में कहीं नज़र नहीं आतीमैं तुम्हारे रोज़ के किस्सों में नहीं छातीना तुम्हारे किसी ख्वाब का हिस्सा हूँहां तुम्हारी हसीं रात का भूला हुआ सा किस्सा हूँतेरा नहीं आना तो अब ज़ाहिर सी बात हैतेरी इंतजारी में ना गुज़रे, कहां ऐसी रात

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