मैं संभल गई

Nandini/ June 25, 2020/ कविता/Poetry/ 2 comments

सुनो, मत आओ यूँ मेरे पास,अब मैं संभल चुकी हूँतुम्हारे हर एहसास, हर बात सेअब मैं संभल चुकी हूँ,अंधेरों से उजाले का सफर तय कर चुकी हूँदेखो, कि मैं संभल चुकी हूँ।उन खोखले अल्फाजों का अब,कोई असर ना मुझपर होगा,भूलना तो कभी तुम्हें चाहा ही नहीं पर,अब मेरी राह का हमसफ़र ना तू होगा,तुम करोगे सवाल,कि क्यों मैं बावली सी

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