कल कभी नहीं आता…

Nandini/ July 10, 2020/ कविता/Poetry/ 9 comments

कल, कभी नहीं आता, जो आता है वो है आज आज जाने दे, कल बहुत सारा समय दूँगा, माफ कर दो, आज काम ज़्यादा था, आ नहीं पाया, लेकिन कल… कल पक्का आऊंगा, कुछ अपनी कहूँगा, कुछ तुम्हारी सुनूँगा, आज, फिर तुम्हारा कल आया था, तुम्हारा इंतज़ार कर, बीता हुआ कल हो गया। कल, कभी नहीं आता, जो आज छोड़

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चालीसवां साल

Nandini/ July 3, 2020/ Social Issues, कविता/Poetry/ 0 comments

कल ही कि तो बात लगती है, जब मैं बाबा के आंगन में खेला करती थी, जब माँ के हाथ से हर ग्रास का, सुख चखा करती थी, जब पहली बार स्कूल गई थी, पहली सहेली बनी थी, पहला वो टिफिन का डब्बा, पहला वो नया नया बस्ता, पहली कट्टी,पहली बट्टी,पहली डांट,पहला पाठ सब लगता है जैसे कल ही की

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ऐ ज़िन्दगी तू बहुत खूबसूरत है

Nandini/ June 26, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 17 comments

ऐ ज़िन्दगी तू बहुत खूबसूरत हैहाँ, ये सच है कि कुछ ग़म से मैं परेशां हूँहाँ, ये सच है कि कुछ दिन से मैं हैरां हूँनहीं हूँ उस तरह की कि जैसे पहले हुआ करती थीनहीं हूँ उस वक़्त की, कि जब दिल खोल के हंसा करती थीलेकिन फिर भी ये सच हैकि तू आज भी उतनी ही खूबसूरत है

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हुनर

Nandini/ June 26, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

मुझमें ये हुनर है, कि मुझमें कोई हुनर नहींजीवन को जीने का जज़्बा तो है,पर कैसे जीना है, ये पता नहीं मैं गल्तियों को अपनी स्वीकारती हूँ,तुम किसी काम की नहीं, ये बोले कोई,उससे पहले ही ये सच जानती हूँ,मैं जानती हूँ, कि कोई मेरी ओरखींचा चला आए,मेरे अंदर ऐसी कोई बात नहीं, ना पाक कला में निपुण हूँ,ना घर

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