कल कुछ यूँ होगा…

Nandini/ July 29, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 10 comments

कल कुछ यूँ होगा, कि हम जुदा हो जाएंगे, चाहें या नहीं, बस हमारे कहाँ चल पाएंगे, जब होगा कुछ यूँ, कि तुम हमें, और हम तुम्हें रोक ना पाएंगे, आंसू भी कहाँ पूरी तरह बह पाएंगे, ये सच है कि हमेशा कुछ नहीं रहता, पर सच तो ये भी है, कि हमारे निशां सदा को रह जाएंगे। खट्टी मीठी

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स्टेपनी

Nandini/ July 7, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 0 comments

सुनो, तुमने कभी गाड़ी की स्टेपनी को गौर से देखा है? कभी सोचा है कि क्या सोचती होगी वो पीछे बैठे बैठे? कहने को तो वो आम पहियों की तरह ही एक पहिया है, उसमें भी हवा का दबाव आम पहियों की तरह ही है तुम उसका भी उतना ही ख्याल रखते हो जितना बाकी पहियों का लेकिन कभी सोचा

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कल रात

Nandini/ July 7, 2020/ कविता/Poetry/ 5 comments

बहुत देर तक बिस्तर पर करवट बदलती रही, वो रूह जो तेरे छूने से आराम पाती थी, मैंने समझाया उसे, बैठाया अपने पास पूछा भी कि क्या हुआ, क्यों है वो उदास। ये ज़ुल्फ़ें बिखरी क्यों हैं, ये कमरे में अंधेरा क्यों है क्यों तू पहले की तरह हंसती नहीं है, क्यों अब चेहरे पर वो उम्मीद नहीं है। आ

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मैं संभल गई

Nandini/ June 25, 2020/ कविता/Poetry/ 2 comments

सुनो, मत आओ यूँ मेरे पास,अब मैं संभल चुकी हूँतुम्हारे हर एहसास, हर बात सेअब मैं संभल चुकी हूँ,अंधेरों से उजाले का सफर तय कर चुकी हूँदेखो, कि मैं संभल चुकी हूँ।उन खोखले अल्फाजों का अब,कोई असर ना मुझपर होगा,भूलना तो कभी तुम्हें चाहा ही नहीं पर,अब मेरी राह का हमसफ़र ना तू होगा,तुम करोगे सवाल,कि क्यों मैं बावली सी

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यूँही कह दिया था तुमने

Nandini/ June 24, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

यूँही कह दिया था तुमने इस बार मिलेंगे हमखोखले दिल में अरमानों का, इक रंग भरेंगे हम ना जाने कितनी बातें, हर रोज़ मैं खुद से करतीअपने दिल के सारे राज़, तुम्हीं से साँझा करती सोचा था, उस मंदिर ले जाउंगी तुम्हें,स्कूल से भाग कर जहाँ, घंटों बैठा करती थीउन गलियों से गुज़रूँगी तुम्हारे साथ,जहाँ बचपन की यादों ने घर

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