मुझमें ही बसा करते हो…

Nandini/ December 9, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 0 comments

तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा

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मैं तैनूं फेर मिलांगी…..

Nandini/ June 24, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

प्यार में डूबे हर दिल ने कभी ना कभी अपने प्रेम को छोड़कर कहीं दूर जाते हुए तसल्ली के ये चार लफ्ज़ ज़रूर कहे होंगे। और कहें भी क्यों ना, किसे भाता है अपने प्यार से दूर जाना ? कौन चाहता है कि वो उस एक व्यक्ति से जुदा हो जाए, जिससे वो शायद दुनिया में सबसे ज़्यादा प्यार करता

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बातें….

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

बातें जैसे ख़त्म सी हो गईं हैं, दिल में तूफानों का रेला सा हैबनते बिगड़ते अरमानों का मेला सा है,फिर भी जाने क्यों, बातें जैसे थम सी गईं हैं। कहने को तो ये भी कह दूँ, साँसें बोझिल लगती हैंतुम बिन मेरी रातें जैसे, सीली सीली गुज़रती हैंये भी कहना था, कि अनजान डर से दिल बैठा सा जाता है,.दूर

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प्यार, उम्र और समाज..

Nandini/ June 20, 2020/ Love, Social Issues/ 0 comments

देखो तो ज़रा, ना उम्र का लिहाज़ किया ना  जवान बच्चों का , भला ये  भी कोई उम्र है दूसरी शादी की ? भई हमने तो इस उम्र में माँ–बाप को बच्चों की शादी के लिए दौड़ते भागते देखा है ,यहाँ तो रीत ही पलट दी इन लोगों ने , माँ–बाप मंडप में बैठे हैं और बच्चे अतिथि स्वागत में

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