मुझमें ही बसा करते हो…

Nandini/ December 9, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 0 comments

तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा

Read More

कल कुछ यूँ होगा…

Nandini/ July 29, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 10 comments

कल कुछ यूँ होगा, कि हम जुदा हो जाएंगे, चाहें या नहीं, बस हमारे कहाँ चल पाएंगे, जब होगा कुछ यूँ, कि तुम हमें, और हम तुम्हें रोक ना पाएंगे, आंसू भी कहाँ पूरी तरह बह पाएंगे, ये सच है कि हमेशा कुछ नहीं रहता, पर सच तो ये भी है, कि हमारे निशां सदा को रह जाएंगे। खट्टी मीठी

Read More

स्टेपनी

Nandini/ July 7, 2020/ Love, कविता/Poetry/ 0 comments

सुनो, तुमने कभी गाड़ी की स्टेपनी को गौर से देखा है? कभी सोचा है कि क्या सोचती होगी वो पीछे बैठे बैठे? कहने को तो वो आम पहियों की तरह ही एक पहिया है, उसमें भी हवा का दबाव आम पहियों की तरह ही है तुम उसका भी उतना ही ख्याल रखते हो जितना बाकी पहियों का लेकिन कभी सोचा

Read More

कल रात

Nandini/ July 7, 2020/ कविता/Poetry/ 5 comments

बहुत देर तक बिस्तर पर करवट बदलती रही, वो रूह जो तेरे छूने से आराम पाती थी, मैंने समझाया उसे, बैठाया अपने पास पूछा भी कि क्या हुआ, क्यों है वो उदास। ये ज़ुल्फ़ें बिखरी क्यों हैं, ये कमरे में अंधेरा क्यों है क्यों तू पहले की तरह हंसती नहीं है, क्यों अब चेहरे पर वो उम्मीद नहीं है। आ

Read More

चालीसवां साल

Nandini/ July 3, 2020/ Social Issues, कविता/Poetry/ 0 comments

कल ही कि तो बात लगती है, जब मैं बाबा के आंगन में खेला करती थी, जब माँ के हाथ से हर ग्रास का, सुख चखा करती थी, जब पहली बार स्कूल गई थी, पहली सहेली बनी थी, पहला वो टिफिन का डब्बा, पहला वो नया नया बस्ता, पहली कट्टी,पहली बट्टी,पहली डांट,पहला पाठ सब लगता है जैसे कल ही की

Read More