वो प्यार ही क्या, जो तन्हा कर जाए

Nandini/ June 23, 2020/ कविता/Poetry/ 0 comments

सपनों की दुनिया से, जब हकीकत की ज़मीं पर आए
कांटे ही कांटे थे राहों में, जहां जहां कदम बढ़ाए

हर रिश्ता, हर लम्हा जैसे, बेमानी लगने लगता है,
जब अपना कोई हम पर, इस तरह उंगली उठाए

वो, जो वादा करके निभाने का दावा किया करते हैं,
क्या हुआ उस वादे का, अंजाम कोई उनको बतलाए

आसां नहीं है किसी के लिए, दुनिया को छोड़ देना
दिल पे पत्थर रख हमने, तेरे ये सच अपनाए

औरों की महफिलों में, जब हंसी तेरी गूंजा करती है
ना पूछ मेरे दिल पे रात ने कितने खंजर हैं चलाए

तू बड़ी आसानी से, हर बात टाल जाता है
मेरे हाल -ए- दिल के राज़, तुझे कभी दिख नहीं पाए

मैं शिकवा करूँ या, गिला करूँ भी तो किससे,
मेरे नसीब में तो केवल, तेरे मजबूर हालात ही हैं आए,

तेरे प्यार में कोई खोट हो, ऐसा भी नहीं ए दोस्त,
लेकिन, वो प्यार ही क्या, जो हर पल तन्हा कर जाए।

~नन्दिनी

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